कोई नहीं है यहाँ

अब पलटकर देखना छोड़ दे दिल मेरे,
कोई नहीं है यहाँ तेरे नाज़ उठाने के लिए|

अब जो जल कर खाक हुआ दामन मेरा,
आये हैं चंद हबीब आग बुझाने के लिए|
कोई नहीं है यहाँ तेरे नाज़ उठाने के लिए…

बेबस हैं लकीरों के आगे हाथ मेरे,
बस मांग रहे हैं दुआ क़ज़ा आने के लिए|
कोई नहीं है यहाँ तेरे नाज़ उठाने के लिए…

क्या जिंदगी इस मोहब्बत ने बख्शी है ‘वीर’,
हम जिये जा रहे हैं तेरे फ़साने के लिए|

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