कोशिश

दीवार कोई दरमियान बनाने की कोशिश है,
किसी और से पहले खुद को मनाने की कोशिश है|

दूसरा खुदा मिल जायेगा तुम्हें फिर कोई ‘वीर’,
अभी सिर्फ अपना ईमान बचाने की कोशिश है|

वो अपनी चादर के किनारों से उलझे रहे ‘वीर’,
उनकी हमें ख्वाबों से मिटाने की कोशिश है|

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