कुछ ख्वाब न देखें

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कुछ ख्वाब न देखें तो गुज़ारा नहीं होता,
जो हमारा है हकीक़त में.. हमारा नहीं होता|

गर उसकी नज़र से मेरी नज़र मिल जाए,
दुनिया में इससे खूबसूरत नज़ारा नहीं होता|
कुछ ख्वाब न देखें तो गुज़ारा नहीं होता…

तुम तो बहते बहते समंदर में जा मिले,
सच है के दरिया का कोई किनारा नहीं होता|
कुछ ख्वाब न देखें तो गुज़ारा नहीं होता…

जो आज है कल रहे न रहे नादाँ,
उम्र भर निभाये ऐसा कोई सहारा नहीं होता|
कुछ ख्वाब न देखें तो गुज़ारा नहीं होता…

थाम के रखो गर हासिल हो तुम्हें मोहब्बत,
लकीरों से ये इत्तेफ़ाक दुबारा नहीं होता|
कुछ ख्वाब न देखें तो गुज़ारा नहीं होता…

जिसपर निगाह थी वही टूट कर जा गिरा,
मेरे नाम का रोज़ कोई सितारा नहीं होता|
कुछ ख्वाब न देखें तो गुज़ारा नहीं होता…

इस सिलसिले में सारी उम्र बीत गयी ‘वीर’,
जिसके तुम हो गए वो तुम्हारा नहीं होता|
कुछ ख्वाब न देखें तो गुज़ारा नहीं होता…

थोड़ी बेवफाई से ज़माना ख़राब क्या होगा ‘वीर’,
चुटकी भर नमक से दरिया खारा नहीं होता|

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