क्या बतायें के हाल कैसा है

क्या बतायें के हाल कैसा है,
मुझे खुद से ये मलाल कैसा है|

अब भी गुज़रे वक्त में जी रहा हूँ,
कल क्या होगा? ये सवाल कैसा है!
क्या बतायें के हाल कैसा है…

जकड़े रहती है दिन भर बाँहों में,
मतलबी दुनिया का बवाल कैसा है|
क्या बतायें के हाल कैसा है…

एक गाँठ सुलझती है तो नयी पड़ जाती है,
ये किसने बुना था? ये जाल कैसा है!
क्या बतायें के हाल कैसा है…

 

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