क्यों है वीर

शायर-ए-फितरत हुआ, क्यों है वीर,
लबों पर खामोश दुआ, क्यों है वीर|

ना बदला है कुछ भी तो यहाँ,
फिर भी तू गुलज़ार हुआ, क्यों है वीर|

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