लफ़्ज़ों में तेरी बात

लफ़्ज़ों का बस साथ रहे,
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे|

रहे न रहे क़द-ए-सुखन ऊंचा,
मगर लफ़्ज़ों में जज़्बात रहे|
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे…

हर इबादत में यही दुआ है,
तू खुश रहे तू आबाद रहे|
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे…

लफ़्ज़ों की उम्र नहीं कोई ‘वीर’,
महकेंगे जब तलक कायनात रहे|
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे…

वो कमजोरी हैं या ताक़त ‘वीर’,
तेरे लफ़्ज़ों को ये सवालात रहे|
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे…

0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes