लफ़्ज़ों में तेरी बात

लफ़्ज़ों का बस साथ रहे,
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे|

रहे न रहे क़द-ए-सुखन ऊंचा,
मगर लफ़्ज़ों में जज़्बात रहे|
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे…

हर इबादत में यही दुआ है,
तू खुश रहे तू आबाद रहे|
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे…

लफ़्ज़ों की उम्र नहीं कोई ‘वीर’,
महकेंगे जब तलक कायनात रहे|
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे…

वो कमजोरी हैं या ताक़त ‘वीर’,
तेरे लफ़्ज़ों को ये सवालात रहे|
और लफ़्ज़ों में तेरी बात रहे…

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  • Very beautiful poetry Veer! Thanks for testing Livefyre and welcome to the community! Let us know if you have any questions, we’ll be happy to answer them!

  • @Dhara Mistry Good innovation on integrating social interactions and comments. I am not able to import old comments to Livefyre. Is there a way I can trigger import?

  • @Veer Hey Veer, our backend shows two comments were not imported. I’ll pass this to an engineer for him to dig further. Will keep you in the loop. Let us know if you’ve any other questions!

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