मगर कोई कमी है

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मैं तुझे अपनी आँखों में भर तो लूँ ज़रा,
न जाने क्यों वक़्त को, गुज़रने की हड़बड़ी है|

गुज़र जायेगा मगर.. फिर से आएगा ज़रूर,
ये जीवन दुःख और सुख की कड़ी दर कड़ी है|
न जाने क्यों वक़्त को, गुज़रने की हड़बड़ी है…

हैरत है के अब भी जिंदा हूँ किस तरह,
देख जिंदिगी अब भी उसी मकाम पर खड़ी है|
न जाने क्यों वक़्त को, गुज़रने की हड़बड़ी है…

ख़ामोशी का मतलब सुकून है.. या बेबसी है,
तुझ बिन हर मंज़र में मगर कोई कमी है|

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