मैं हुंकार लेकर

जितना पीछे खींचकर रोकोगे मुझे,
उतना आगे बढूंगा मैं हुंकार लेकर |

उठा हूँ एक ज़र्रे से आंधी बनकर,
मैं अपने आगोश में गुबार लेकर |
उतना आगे बढूंगा मैं हुंकार लेकर…

ये क्या शोलों से डराते हो मुझे,
मैं चलता हूँ हाथों में अंगार लेकर |
उतना आगे बढूंगा मैं हुंकार लेकर…

इस जूनून ने सबकी ज़बीं झुकाई है,
मैं बढ़ता हूँ महनत का औज़ार लेकर |
उतना आगे बढूंगा मैं हुंकार लेकर…

परवाह नहीं, दिल से टपकते लहू की,
मैं मदहोश हूँ आँखों में खुमार लेकर |
उतना आगे बढूंगा मैं हुंकार लेकर…

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  • yashodadigvijay4

    आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 07/11/2012  को http://nayi-purani-halchal.blogspot.inपर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों  को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है .                                       धन्यवाद!

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