मैं जिधर गया

बहुत खूबसूरत था जो गुज़र गया,
बस मलाल है के क्यों गुज़र गया|

वो मैं ही था और वो तुम ही थे,
जो दरमियान था जाने किधर गया|

मुझसे साए सी जुडी है वो तसवीरें,
नज़र आती रहीं मैं जिधर गया|

इस ख्वाब की फितरत अजब थी ‘वीर’,
जो तामीर हुआ तो बिखर गया|

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