मैं खुद को ढूँढ रहा हूँ

तिनका तिनका समेट रहा हूँ,
मैं खुद को ढूँढ रहा हूँ|

क्या छुपा है ज़हन में,
मैं खुद से पूछ रहा हूँ|

क्या मरासिम है जिंदिगी से,
मैं मायने ढूँढ रहा हूँ|

खोखली लगती है सारी दुनिया,
मैं क्या ढूँढ रहा हूँ|

इतने साये हैं मुझसे लिपटे,
अपना साया ढूँढ रहा हूँ|

खामोश अंधेरा तन्हा सवेरा,
हर रोज मैं क्यों उठ रहा हूँ|

कोई देदे एक ख्वाब अधूरा सा,
मैं नया जाल बुन रहा हूँ|

ज़ाया ना कर आवाज़ मेरे दर पे,
मैं तुझे बस सुन रहा हूँ|

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