मलाल भी मुझे हर शाम हुआ

शक्ल हर दिन की कल जैसी रही,
मलाल भी मुझे हर शाम हुआ|

हकीकत है की भूलती नहीं मुझको,
खुद अपनी हस्ती का मैं गुलाम हुआ|
मलाल भी मुझे हर शाम हुआ…

जो मिला था वो सफ़र के नाम हुआ,
कोशिशों का देखिए क्या अंजाम हुआ|
मलाल भी मुझे हर शाम हुआ…

मुश्किल है हर क्यों का जवाब ‘वीर’,
जब भी पुछा मैंने उनसे इलज़ाम हुआ|
मलाल भी मुझे हर शाम हुआ…

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