मौला

अब की बार न हो मेरा ये हाल मौला,
गुज़रे कुछ आराम से ये साल मौला |

मैं खुद को बस पा जाऊं इस बरस,
टूट जाए रिश्तों का ये जाल मौला |
गुज़रे कुछ आराम से ये साल मौला…

बहुत तन्हा हूँ तेरी इस दुनिया में,
मुझे इस भंवर से निकाल मौला |
गुज़रे कुछ आराम से ये साल मौला…

तेरे वजूद पर मुझे शक भी हुआ है,
और न रहे अब कोई सवाल मौला |
गुज़रे कुछ आराम से ये साल मौला…

उम्र यूँ ही गुजर रही है बेवजह मेरी,
रह न जाए जिंदिगी से मलाल मौला |
गुज़रे कुछ आराम से ये साल मौला…

क्या मेरी इन्तहा है क्या मेरा जूनून,
मुझे अपने ही रंग में रंग डाल मौला |
गुज़रे कुछ आराम से ये साल मौला…

अब देखा नहीं जाता तमाशा ‘वीर’ से,
कहाँ मैं और कहाँ ये बवाल मौला |
गुज़रे कुछ आराम से ये साल मौला…

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