मेरी इस ज़िद ने

मेरी इस ज़िद ने कितने रिश्ते मिटा दिए,
अहम की आग ने  कई साथ जला दिए|

कहीं मेरी तलाश गुमराह न कर दे उसे,
मैंने ये सोच कर अपने अरमान बुझा दिए|
मेरी इस ज़िद ने कितने रिश्ते मिटा दिए…

वो जब चाहे लौट कर आ सके मुझ तक,
मैंने उसकी हर मंजिल पर रास्ते बिछा दिए|
मेरी इस ज़िद ने कितने रिश्ते मिटा दिए…

उम्र भर वास्ता रहा जज़्बाती लोगों से ‘वीर’,
इस दीवानेपन ने उनके भी होश उड़ा दिए|
मेरी इस ज़िद ने कितने रिश्ते मिटा दिए…

5.00 avg. rating (88% score) - 1 vote
%d bloggers like this: