मेरी कलम टूट गई

मैंने बात झूट कही,
मेरी कलम टूट गई|

अच्छा ही हुआ शायद,
ये आदत भी छूट गई|
मेरी कलम टूट गई…

मेरी हमराह थी वो,
मुझसे ही रूठ गई|
मेरी कलम टूट गई…

ख्वाबों का था खज़ाना एक,
जिंदिगी उसे लूट गई|
मेरी कलम टूट गई…

0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes
  • बहुत उम्दा!

    • वीर

      शुक्रिया समीर जी|

  • कभी कभी ऐसा लगता ही है। आप टूटी कलम से भी अच्छा लिखते हैं। शुभकामनायें

%d bloggers like this: