मोहब्बत कम से होती है

दुआ मांगते बहुत हैं पर इबादत चंद से होती है,
इश्क बहुतों से हुआ पर मोहब्बत कम से होती है |

तुम मेरी आवाज़ को यूँ नज़रंदाज़ मत किया करो,
हर इंकलाब की आगाज़ ज़ुल्म ओ सितम से होती है |
इश्क बहुतों से हुआ पर मोहब्बत कम से होती है…

कभी मेरे इस ज़हन पर अपना कान रखकर सुन,
दिल टूटता है जब अंदर तो आवाज़ छन से होती है |
इश्क बहुतों से हुआ पर मोहब्बत कम से होती है…

वो रिश्ते हर हालात में आपका साथ निभाते हैं,
जिनकी शुरुवात एक दुसरे के गम से होती है |
इश्क बहुतों से हुआ पर मोहब्बत कम से होती है…

तुम अपनी कामयाबी को जो भी चाहो नाम दो,
मगर एक इंसा की पहचान उसके करम से होती है |
इश्क बहुतों से हुआ पर मोहब्बत कम से होती है…

मुझे खुद अपने से भी बेवफ़ा होना मंज़ूर है ‘वीर’,
एक सुखनवर की वफादारी पहले कलम से होती है|

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