मुझको पी गई शराब

हाथ ना लगाओ इसे, ये चीज़ है खराब,
कुछ मैंने पी, कुछ मुझको पी गई शराब|

मेरी बेखुदी का कोई क्या देगा जवाब,
फिर आज मुझे तन्हा छोड़ गई शराब|
कुछ मैंने पी, कुछ मुझको पी गई शराब…

दर्द को पहना रखा है मुस्कुराहट का नकाब,
जैसे ज़हर को अपने अंदर छुपा गई शराब|
कुछ मैंने पी, कुछ मुझको पी गई शराब…

जिंदगी के हर मोड़ पर आया एक सैलाब,
उम्र गुजरी जैसे उलटी बोतल से बह गई शराब|
कुछ मैंने पी, कुछ मुझको पी गई शराब…

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