मुझसे एक सौदा

Mujhse ek sauda

मुझसे एक सौदा अपनी पूरी कीमत का कर ले जिंदिगी,
मुझे यूँ बार-बार किश्तों में जीना मंज़ूर नहीं|

जिंदिगी बदलती है क्यों मेरा रास्ता हर नये मोड पर,
मेरी मंजिल तो मैं खुद हूँ, इसमें रास्तों का कसूर नहीं|
मुझसे एक सौदा अपनी पूरी कीमत का कर ले जिंदिगी…

तेरी अपनी ही रवायत है और तेरी अपनी ही एक फितरत,
तुझे हर हाल में कबूल करूँ, मैं इतना मजबूर नहीं|
मुझसे एक सौदा अपनी पूरी कीमत का कर ले जिंदिगी…

अपने पांव के नीचे हमेशा ज़मीन रखता है,
उसे नवाज़ा है खुदा ने बहुत, मगर वो मगरूर नहीं|
मुझसे एक सौदा अपनी पूरी कीमत का कर ले जिंदिगी…

तुमसे ही रहता है रोशन चाँद का चेहरा हर रात,
तुम्हारे मुंह फेर लेने पर, ये नूर तो कोई नूर नहीं|
मुझसे एक सौदा अपनी पूरी कीमत का कर ले जिंदिगी…

अपनी आखरी साँस तलक उसका मुन्तज़िर रहा ‘वीर’,
जो पास रहकर भी दूर है और जो दूर रहकर भी दूर नहीं|
मुझसे एक सौदा अपनी पूरी कीमत का कर ले जिंदिगी…

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  • Deevasg

    Khoob hai Veer Sahab!!

  • sangeetaswarup

    बहुत खूब 

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