मुन्तज़िर नाउम्मीद

मुन्तज़िर नाउम्मीद से हो गए थे हम,
मौत के कितने करीब हो गए थे हम|

खैर सांसे रहते आप लौट तो आये,
अकेले कितने अजीब हो गए थे हम|
मौत के कितने करीब हो गए थे हम…

उसका ज़िक्र बातों में ढूँढते रहे ‘वीर’,
नदीम अपने रकीब के हो गए थे हम|
मौत के कितने करीब हो गए थे हम…

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