नाराज़ तुमसे

कह दूं ये राज़ तुमसे,
के मैं हूँ नाराज़ तुमसे|

झूमते हो मेरे लफ़्ज़ों पर,
छीन लूं ये साज़ तुमसे|
के मैं हूँ नाराज़ तुमसे…

ये कुर्बत है और फासला भी,
जोड़ते हैं मुझे अलफ़ाज़ तुमसे|
के मैं हूँ नाराज़ तुमसे…

बेखुदी में फ़ना होगा ‘वीर’,
अंजाम की होगी आगाज़ तुमसे|
के मैं हूँ नाराज़ तुमसे…

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