नज़र का फेर है प्यारे

सपनों का ढेर है प्यारे,
बस नज़र का फेर है प्यारे|

तू ही डर, तू ही हिम्मत, तू ही ताकत,
गीदड़ में छुपा शेर है प्यारे|
बस नज़र का फेर है प्यारे…

तु ही मुसाफ़िर, तू ही कारवां, तू ही मंजिल,
फिर किस बात की देर है प्यारे|
बस नज़र का फेर है प्यारे…

कौन अपना, कौन पराया, किसका तू,
सब तेरे हैं कौन गैर है प्यारे|
बस नज़र का फेर है प्यारे…

तेरी हिम्मत से झुखेगा आसमा भी,
बस थोड़ी देर सवेर है प्यारे|
बस नज़र का फेर है प्यारे…

जो करना है कर ले आज ही ‘वीर’,
उम्र उडती हुई बटेर है प्यारे|
बस नज़र का फेर है प्यारे…

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बस कर प्रेम उसे पूरी शिद्दत से,
वो खा लेगा तेरे झूटे बेर * प्यारे|

हर हाथ में है टुटा हुआ कटोरा,
क्यों है लोगों में बैर प्यारे|

* – (राम ने शबरी के झूटे बेर खाए थे)

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  • तेरी हिम्मत से झुखेगा आसमा भी,
    बस थोड़ी देर सवेर है प्यारे|
    बस नज़र का फेर है प्यारे…
    बहुत अच्छी लगी आपकी यह रचना बहुत बहुत धन्यवाद !!

  • Raghu

    तु ही मुसाफ़िर, तू ही कारवां, तू ही मंजिल,
    फिर किस बात की देर है प्यारे|
    बस नज़र का फेर है प्यारे…

    बहुत खूब .बधाई हो …
    क्या लिखा है आपने नजर पे वाह जनाब वाह !!

  • panku_lko Couldn’t get time to tweet “nazar ka pher hai pyare”. Here is this link to it -http://veeransh.com/ghazal/nazar-ka-pher-hai-pyare

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