नज़र से गिराने का क्या फ़ायदा

एहद-ए-वफ़ा को निभाने का क्या फ़ायदा,
मुझे मेरी नज़र से गिराने का क्या फ़ायदा|

इंसान हूँ तो मुझमें दरारें होना जायज़ है,
मेरी कच्ची दीवारें ढहाने का क्या फ़ायदा|
मुझे मेरी नज़र से गिराने का क्या फ़ायदा…

डह जाए जो एक परिंदे के पंख की हवा से,
ऐसे कमज़ोर घर को बचाने का क्या फ़ायदा|
मुझे मेरी नज़र से गिराने का क्या फ़ायदा…

निबाह ना सके जो तेरा साथ मुश्किलों में,
ऐसे कागज़ी रिश्तों को गिनाने का क्या फ़ायदा|
मुझे मेरी नज़र से गिराने का क्या फ़ायदा…

जो सो गए हैं अब थक हार कर तेरे अंदर,
उन पुराने ग़मों को जगाने का क्या फ़ायदा|
मुझे मेरी नज़र से गिराने का क्या फ़ायदा…

मेरी नाकामियां मुझको ही गिनाकर ‘वीर’,
अपनी झूटी शक्सियत सजाने का क्या फ़ायदा|
मुझे मेरी नज़र से गिराने का क्या फ़ायदा…

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