नींद का सौदा

रात घूरता हर तारा है मुझे,
नींद का हर सौदा गवारा है मुझे|

जागते जागते आंखें थक गई,
किस मर्ज़ ने मारा है मुझे|
नींद का हर सौदा गवारा है मुझे…

इस खेल का वो पुराना खिलाडी है,
उसने हर शर्त पे हारा है मुझे|
नींद का हर सौदा गवारा है मुझे…

मैं तो ढलता गया तेरे हुकुम पर,
जिंदिगी तूने क्यों नकारा है मुझे|
नींद का हर सौदा गवारा है मुझे…

अब जो भी दे सज़ा मंजूर है ‘वीर’,
इलज़ाम कबूल सारा है मुझे|

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