फीकी बात

गहरी बात, तीखी बात,
करते हो तुम फीकी बात|

क्या इनमे कुछ है तुम्हारा,
या बोल रहे हो सीखी बात|
करते हो तुम फीकी बात..

मोड़ दिए फिर बेजान लफ्ज़,
करते क्यों नहीं सीधी बात|
करते हो तुम फीकी बात..

रूखे मुंह से बोली तुमने,
जज्बातों में सीती बात|
करते हो तुम फीकी बात..

तडपते रहे हम उम्र भर,
दिल में रखकर बीती बात|
करते हो तुम फीकी बात..

तुम कड़वे ही रहोगे ‘वीर’,
कहते क्यों नहीं मीठी बात|

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