फीकी बात

गहरी बात, तीखी बात,
करते हो तुम फीकी बात|

क्या इनमे कुछ है तुम्हारा,
या बोल रहे हो सीखी बात|
करते हो तुम फीकी बात..

मोड़ दिए फिर बेजान लफ्ज़,
करते क्यों नहीं सीधी बात|
करते हो तुम फीकी बात..

रूखे मुंह से बोली तुमने,
जज्बातों में सीती बात|
करते हो तुम फीकी बात..

तडपते रहे हम उम्र भर,
दिल में रखकर बीती बात|
करते हो तुम फीकी बात..

तुम कड़वे ही रहोगे ‘वीर’,
कहते क्यों नहीं मीठी बात|

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  • Chandrama

    Bahut khoob! I had this thought. How beautiful would it be if there were no words. The thoughts would have remained untouched and pious. We trap them in these silly letters. Like you said…Pheeki baat!

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