फिर गुमान हुआ है

सदमा खुदसे बिछड़ जाने का,
फिर गुमान हुआ है तुम्हें पाने का|

हासिल मोहब्बत का हमने ये जाना,
जिंदगी नाम नहीं है मुरझाने का|
फिर गुमान हुआ है तुम्हें पाने का…

मुश्किल है हर हसरत का जिस्म होना,
आँखों से गिला कैसा, यूँ छलक जाने का|
फिर गुमान हुआ है तुम्हें पाने का..

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