कातिल बना गयी

मेरी कमज़ोरी मेरा दामन जला गयी,
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी|

मेरी मोहब्बत शायद काफी ना थी,
मेरी फितरत मुझे नाकाबिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

तुम मेरे नुस्क ना संभाल पाये,
मेरी आवारगी मुझे साहिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

खुदा तुमने बस एक दिल ही तो दिया,
मेरी इबादत मुझे काफ़िर बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

मैं तो बस मिट गया तेरी वफ़ा में,
आरजू मुझे हासिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

चलो तेरी कहानी से ये तो हुआ ‘वीर’,
कितनो को ये प्यार के काबिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes
  • Raghu

    खुदा तुमने बस एक दिल ही तो दिया,
    मेरी इबादत मुझे काफ़िर बना गयी|
    मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

    मैं तो बस मिट गया तेरी वफ़ा में,
    आरजू मुझे हासिल बना गयी|
    मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

    वाह जनाब वाह क्या बात कह दी आपने दो …
    बहुत गजब का लिखा है . .
    आपको और आपकी लेखनी को मेरा सलाम .

    • वीर

      शुक्रिया!

  • bahut khub

    shandar rachna

  • alpz2009

    bahut khuub!

%d bloggers like this: