कातिल बना गयी

मेरी कमज़ोरी मेरा दामन जला गयी,
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी|

मेरी मोहब्बत शायद काफी ना थी,
मेरी फितरत मुझे नाकाबिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

तुम मेरे नुस्क ना संभाल पाये,
मेरी आवारगी मुझे साहिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

खुदा तुमने बस एक दिल ही तो दिया,
मेरी इबादत मुझे काफ़िर बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

मैं तो बस मिट गया तेरी वफ़ा में,
आरजू मुझे हासिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

चलो तेरी कहानी से ये तो हुआ ‘वीर’,
कितनो को ये प्यार के काबिल बना गयी|
मेरी खुदी मुझे कातिल बना गयी…

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