रुखा सा लम्हा

रुखा सा लम्हा ले कर उसे,
हम नम बना लिया करते हैं|

तेरे बिना वक्त की सदियाँ,
हम यूँ गुज़ार लिया करते हैं|

याद जब खलिश सी लगती है,
नाम तेरा पुकार लिया करते हैं|

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  • बहुत सुंदर रचना

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