साथ तो हैं मगर जुदा हैं हम

एक दूसरे के दिल की खता हैं हम,
साथ तो हैं मगर जुदा हैं हम|

मुझसे रहमत की उम्मीद ना रख,
बेदिल हो चूका वो खुदा हैं हम|
साथ तो हैं मगर जुदा हैं हम…

इस सच से मेरी कोई पर्दादारी नहीं,
थोड़ा ज़हर है जिसमें वो दवा हैं हम|
साथ तो हैं मगर जुदा हैं हम…

कोई बात ना कहने की है ना सुनने की,
वो नाराज हैं हम से और उनसे खफा हैं हम|
साथ तो हैं मगर जुदा हैं हम…

धूप ले गयी इन आँखों की ओस सारी,
किसी हाथ ना आएंगे अब सिर्फ धुआँ हैं हम|
साथ तो हैं मगर जुदा हैं हम..

किताब-ऐ-जिंदगी में मेरा कोई जिक्र नहीं ‘वीर’,
लिखते लिखते जो ना लिखा वो सफा हैं हम|
साथ तो हैं मगर जुदा हैं हम…

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