सीने से लगा

ये ज़रूरी नहीं की इकरार ए वफ़ा जुबानो तक जाए,
सीने से लगा तो दिल की बात सीधे कानों तक जाए |

दोस्ती, इश्क, मोहब्बत – कोई भी नाम दीजिये करम को,
ये तो कोई बात नहीं की हर बात एहसानो तक जाए |
सीने से लगा तो दिल की बात सीधे कानों तक जाए…

तुम्हें याद करने वालों की जहाँ में कोई कमी तो नहीं है,
ये ठीक नहीं की हर हिचकी का इलज़ाम दीवानों तक जाए |
सीने से लगा तो दिल की बात सीधे कानों तक जाए…

खामोश दिल ही दिल में ख़ाक हुआ जाता है दर्द का शोला,
कभी आँख से बाहर निकले तो दर्द निगेहबानो तक जाए |
सीने से लगा तो दिल की बात सीधे कानों तक जाए…

अब तो हर नज़र से बूँद-बूँद पीता हूँ शबनम दिन भर,
कौन इंतज़ार करे, कौन शाम ढाले मयखानो तक जाए |
सीने से लगा तो दिल की बात सीधे कानों तक जाए…

अब तलक संभाल कर रखा है तेरे नाम का तीर मैंने,
तीर तीर का क्या भरोसा की हमेशा निशानों तक जाए|
सीने से लगा तो दिल की बात सीधे कानों तक जाए…

आदमी उस खुदगर्ज़ हस्ती का नाम है यहाँ ‘वीर’,
जिसकी दुआ का दायरा ज़रूरत से अरमानो तक जाए|

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  • sangeetaswarup

    खूबसूरत रचना

  • yashodadigvijay4

    <i><B> आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 19/01/2013  को <a href=http://nayi-purani-halchal.blogspot.in> http://nayi-purani-halchal.blogspot.in </a> पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों  को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है .                                       धन्यवाद! </B></i>

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