तराशा हुआ पत्थर हूँ

tarasha-hua-pathhar-hoon

तराशा हुआ पत्थर हूँ, अब बस टूटना बाकी है,
पुर्जे तो मेरे कर चुके हो, अब बस लूटना बाकी है|

हर शक्स ईमारत ए सब्र के आखिरी छोर पर है,
उम्मीद हार चुका है, अब बस कूदना बाकी है|
तराशा हुआ पत्थर हूँ, अब बस टूटना बाकी है…

राह में नज़र चुरा कर चले जाते हो,
बेरुखी हो चुकी, अब बस मुंह फेरना बाकी है|
तराशा हुआ पत्थर हूँ, अब बस टूटना बाकी है…

है फैसला खुद को नए सिरे से पिरोने का,
इल्म ए मंज़िल है, अब बस राह ढूंढना बाकी है|
तराशा हुआ पत्थर हूँ, अब बस टूटना बाकी है…

मैं हार चुका हूँ अपना सब कुछ तुझसे मोहब्बत,
मगर ये दिल अब भी है.. जिसे जीतना बाकी है|

तराशा हुआ पत्थर हूँ
0 votes, 0.00 avg. rating (0% score)