तुझ में साथ चलने का

मैं तोड़ दूँगा सारी बंदिशें,
तुझ में साथ चलने का जिगर रहे|

आवारगी कितना भी करे गुमराह,
मगर घर तक जाती कोई डगर रहे|

सब हासिल कितना बेरंग होगा,
जिंदगी में कुछ तो कसर रहे|

तनहा रास्तों से कोई डर तो नहीं,
बात कुछ और गर कोई हमसफ़र रहे|

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