तुम्हारे लिए

कुछ दर्द भुला रखे है तुम्हारे लिए,
अपने गम छुपा रखे हैं तुम्हारे लिए|

तुम तोड़ दो मेरी हसरतों का पुलिंदा,
कुछ ख्वाब सजा रखे हैं तुम्हारे लिए|

एक-एक अश्क वो बहुत कीमती है,
मैंने दामन बिछा रखे हैं तुम्हारे लिए|

अपनी कहानी ना कह पाऊँगा तुमसे,
मैंने लफ्ज़ जला रखे हैं तुम्हारे लिए|

हमदर्द नहीं हूँ मैं दोस्त तेरा,
दर्द अपने बना रखे हैं तुम्हारे लिए|

मैं खुदा से पूछता रहा रात भर,
क्यों कांटे बिछा रखे हैं तुम्हारे लिए|

उस खुदा को तूने बहुत रुसवा रखा ‘वीर’,
अब दुआ में हाथ उठा रखे हैं तुम्हारे लिए|

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  • Raghu

    एक-एक अश्क वो बहुत कीमती है,
    मैंने दामन बिछा रखे हैं तुम्हारे लिए|

    अपनी कहानी ना कह पाऊँगा तुमसे,
    मैंने लफ्ज़ जला रखे हैं तुम्हारे लिए|

    बहुत सुंदरा भाव व्यक्त किये है इस रचना में …

    ४-५ बार तो बिना रुके यूँ ही पढता रहा ये रचना

    बहुत बहुत बधाई हो वीर साहब !!

  • कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
    बहुत सुन्दर रचना । आभार
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    Sanjay kumar

  • भावों को इतनी सुंदरता से शब्दों में पिरोया है
    सुंदर रचना….

    Sanjay kumar

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