तुम्हें भी प्यार हो जाता

अगर तुम देख सकते खुद को मेरी निगाहों से,
तुम्हें भी प्यार हो जाता खुद की अदाओं से |

जब तुम्हारी ये मासूम ज़ुल्फें तुम्हें सताती हैं,
तब मेरी उँगलियाँ मचलती हैं ख्याल-ए-खताओं से |
तुम्हें भी प्यार हो जाता खुद की अदाओं से…

तुम्हारा साथ मिला है इस दिल को जबसे,
मुझे डर नहीं लगता रूठी हुई हवाओं से |
तुम्हें भी प्यार हो जाता खुद की अदाओं से…

मुझ काफ़िर को खुदा से तुमने ही मिलवाया है,
तुम्हारे बाद ही नाता जुड़ा है मेरा दुआओं से |
तुम्हें भी प्यार हो जाता खुद की अदाओं से…

तुम्हारा हाथ रहे मेरे इन हाथों में हमनफस,
मैं दुश्मनी भी ले लूँगा उन काली घटाओं से |
तुम्हें भी प्यार हो जाता खुद की अदाओं से…
काफी पुराना मरासिम है गज़ल और ‘वीर’ का,
उसने अपनी दरारों को भरा है खून-ए-सफाओं से |
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