उसकी हम पर नज़र नहीं है

अब बातों में असर नहीं है,
उसकी हम पर नज़र नहीं है|

हौसले ना-उम्मीद हो गए मगर,
कोशिशों में कोई कसर नहीं है|
उसकी हम पर नज़र नहीं है…

मंजिलें हुई धुँधली गर्द से,
और तेरा कोई हमसफ़र नहीं है|
उसकी हम पर नज़र नहीं है…

चल कहीं दूर चलें ‘वीर’,
इस जहाँ में तेरी बसर नहीं है|

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