वक़्त मुख़्तसर है

जिंदगी को कज़ा की मोहलत समझिये,
वक़्त मुख़्तसर है, वक़्त की अहमियत समझिए|

इस खज़ाने का हर लम्हा बाकी से जुदा है,
जिंदगी को पल-पल घटती एक दौलत समझिए|
वक़्त मुख़्तसर है, वक़्त की अहमियत समझिए…

मेरी जुस्तजू है हर एक लम्हा जीने की,
मुझे समझिए, मेरी मोहब्बत समझिए |
वक़्त मुख़्तसर है, वक़्त की अहमियत समझिए…

ऐसे हंसीन इत्तेफ़ाक अक्सर नहीं होते,
मिले हैं हम, हमारी कीमत समझिए |
वक़्त मुख़्तसर है, वक़्त की अहमियत समझिए…

एक नहीं कई हमसफ़र थे तुम्हारे ‘वीर’,
बस कट गई जिंदगी गनिमत समझिए|
वक़्त मुख़्तसर है, वक़्त की अहमियत समझिए…

फिर उठे कोई आंधी और ले जाए कहाँ ‘वीर’,
हम जो यहाँ हैं, इसे किस्मत समझिए |
वक़्त मुख़्तसर है, वक़्त की अहमियत समझिए…

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