वक्त से पहले

वक्त से पहले ही मिल गयी मंजिल मुझे,
और फिर न हुआ ताउम्र कुछ हासिल मुझे |

मैं पूरा समंदर पी गया था लड़कपन में,
फिर कभी दोस्त सा न मिला साहिल मुझे |
और फिर न हुआ ताउम्र कुछ हासिल मुझे…

और कोई नहीं बस एक ही खता हुई तुझसे,
क्यों दे दिया तुने इतना नाज़ुक दिल मुझे |
और फिर न हुआ ताउम्र कुछ हासिल मुझे…

मैंने देखे हैं कई रंग वफ़ा के ‘वीर’ मगर,
कोई न मिला मोहब्बत के काबिल मुझे |

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  • Deevasg

    Achha hai!! Kaafi achha hai.

  • ChetanShah

    kya baat hai Veer….
    nice one….

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