ये तुम हो के मुझे वहम हुआ है

ये तुम हो के मुझे वहम हुआ है,
ये बस लफ्ज़ हैं या फिर तेरी दुआ है |

मालूम होता है सर पर हाथ पहचाना सा,
क्या फिर तुमने मेरी तस्वीर को छुआ है |
ये तुम हो के मुझे वहम हुआ है…

ख्वाब को कह दो बेवक्त आया न करें,
अभी मैं मायूस हूँ और जिंदिगी खफ़ा है |
ये तुम हो के मुझे वहम हुआ है…

ये मज़हब का बाज़ार कब रास आया है हमें,
मोहब्बत ईमान है और मोहब्बत ही खुदा है |
ये तुम हो के मुझे वहम हुआ है…

दिल ए संग पर क्या न गुज़रती होगी ‘वीर’,
इनकी लाख कोशिशों से आदमी न रुका है |
ये तुम हो के मुझे वहम हुआ है…

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