जिंदगी के नाम पर मुझे

मुझे दबा कर ख़ामोशी की सज़ा देते हो,
जिंदगी के नाम पर मुझे क़ज़ा देते हो|

मैं सर से पाँव तलक डूबा हूँ इश्क में,
मुझे किस मर्ज़ से गिला है, मुझे क्या दवा देते हो|
जिंदगी के नाम पर मुझे क़ज़ा देते हो…

हमें होश आएगा नहीं क़यामत के दिन भी ‘वीर’,
हमें जन्नत की आरजू नहीं, बेकार ही तुम दुआ देते हो|
जिंदगी के नाम पर मुझे क़ज़ा देते हो…

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