जिंदिगी की सौगात

जिंदिगी की सौगात को गम में ज़ाया न किजीये,
अफताब सा रहे जीवन, इसे साया न किजीये|

तुम जैसे भी हो वैसे ही मंज़ूर हो मुझे,
खुदको मेरे मुताबिक बनाया न किजीये|
जिंदिगी की सौगात को गम में ज़ाया न किजीये…

अपने तजुर्बों से ही मुकम्मल होता है इंसान,
माज़ी के पन्नों से हादसे मिटाया न किजीये|
जिंदिगी की सौगात को गम में ज़ाया न किजीये…

दर्द मिलेंगे और ज़ख्म भी आयेंगे तुम्हारे हिस्से,
खुदको मगर अपनी बेबसी गिनाया न किजीये|
जिंदिगी की सौगात को गम में ज़ाया न किजीये…

खुल कर जीयो हर साँस लेता हुआ लम्हा,
दिल में किसी हसरत को दबाया न किजीये|

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