जिंदगी से रूठ कर जाएंगे कहाँ

जिंदगी से रूठ कर जाएंगे कहाँ,
भूलना तो चाहेंगे मगर, भूल पाएंगे कहाँ|

बदलना चाहेंगे यहाँ बहूत कुछ मगर,
अपने सिवा किसी को बदल पाएंगे कहाँ|
जिंदगी से रूठ कर जाएंगे कहाँ…

वक़्त के साथ ज़ख्म तो भर जाएंगे ‘वीर’,
मगर दाग दिलों के मिट पाएंगे कहाँ|
जिंदगी से रूठ कर जाएंगे कहाँ…

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