रुक जा यहाँ

रुक रुक, थोडा रुक जा यहाँ|
ये वक्त नहीं अब आने का|

देख देख, सब देख ले यहाँ|
देख ले रंग ज़माने का|

लड़ लड़, लड़ले सबसे तू,
असर क्या है आग लगाने का|

सीख सीख, सीख ले गुलों से,
राज़ हँसते हुए मुरझाने का|

डूब डूब, डूब जा मय में,
ज़रिया है सब भूल जाने का|

एक एक, एक किरदार ही तो है ‘वीर’,
क्यों मुश्किल है इतना निभाने का|

0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes
%d bloggers like this: