बम ब्लास्ट

अपनो की खैरियत जान कर तसल्ली तो हुई मगर,
दिल डूब गया सोच कर उन चंद कम-नसीबों का हाल|

ना राम का भक्त था ना अल्लाह का बंदा,
वो अकेला कमाने वाला था, उसकी यही पहचान थी|

इस बात पर हैरत होना लाज़मी है ‘वीर’,
पूरा समंदर है सब्र और हौसलों का इस शहर में|

तुम चाहे लाख बार बिछा लो इस ज़मीन में बारूद,
ज़िन्दगी ढूँढ़ ही लेगी रास्ता मोहब्बत और अमन का|

क्या मनसूबे लेकर आए हैं ये नफ़रत के सौदागर,
देखो तुम्हारी शिकस्त तुम्हें घूरती है हर आईने में|

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