स्याही के धब्बे

स्याही के कुछ धब्बे सा हूँ मैं..
तुम इनमे मतलब ना ढूंढो,
कोई छिडक गया था बेइरादा इन्हें|

बस उलझे लफ़्ज़ों का भवर है,
जिनमे डूबती है कुछ कागज की कश्तियाँ|

संभालो, तुम्हारी उँगलियों से भवर ना टूट जाए..
इनमे घुटना ही मेरी इन्तेहा है|
स्याही के कुछ धब्बे सा हूँ मैं..

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