तेरे अहसास से

जकड़ता है दर्द अंदर मुझे,
पिघलता हूँ तेरे अहसास से…

बरसों से जमी है नमी आँखों में,
सिमटता हूँ तेरे अहसास से…

थी ख़ामोशी की आदत बरसों से मुझे,
थोडा डरता हूँ तेरी आवाज़ से…

कहीं बेखुदी मेरी ना पी जाये तुझे,
मैं बिखर ना जाऊं तेरे अहसास से..

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