तेरी सादगी

बूंदों में सब डूब सा गया है,
मुदत्तों में आज बादल पिघला है|
और मैं तुमको अपने में समेटे,
नम ज़हन को शाम होते देख रहा हूँ|

इस साहिल से उस समंदर तक,
जो दरमियाँ है,
वही इस आंख से अश्क तक भर गया है|

दिखता तो है कोई अक्स धुन्दला सा..
तुम हो या डूबते सूरज की सदा है|

इस तस्वीर के मायने नहीं है,
मैंने इस खालीपन को तेरा रंग पहना दिया है..
इतने रंग…
फिर भी तेरी सादगी तक नहीं पहुँच पाया हूँ|

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  • Chandrama

    Beautiful. Very very Gulzarish!

  • Sir ji! Aap to chhaa hi gaye ho!!!!!
    All of them are superb, but I loved this one most.

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