तुम रोना मत

अपनी मजबूरियों पर,
दिलों की दूरियों पर,
रात की बेनूरियों पर,
तुम रोना मत|

अपनी तनहाइयों पर,
माज़ी की परछाइयों पर,
ज़माने की नादानियों पर,
तुम रोना मत|

दिल की मायूसियों पर,
दर्द की खामोशियों पर,
इन साँसों की बरबादियों पर,
तुम रोना मत|

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  • KrishnaKumarMishra

    very nice poetry

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