तुम सब कुछ तो जानते हो

मेरे ज़बीं की शिकन,
मेरे लफ़्ज़ों की काँप,
मेरे झूट की तड़प,
मेरे सच की आवाज़,
तुम सब पहचानते हो,
तुम सब कुछ तो जानते हो|

मेरे गम की रातें,
मेरे ज़हन की बातें,
मेरे दर्द की सिसकी,
मेरे हद की हिचकी,
तुम सब पहचानते हो,
तुम सब कुछ तो जानते हो|

मेरे कदमों की आहट,
मेरे ख्यालों की बनावट,
मेरे होसलों की चाहत,
मेरे डर की घबराहट,
तुम सब पहचानते हो,
तुम सब कुछ तो जानते हो|

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