तुम्हें ज़माने की दुआ चाहिए

तुम और मैं, काफी नहीं है जिंदिगी के लिए,
तुम्हें ज़माने की दुआ चाहिए|

नादान मैं क्या समझ बैठा तेरे इश्क को,
तुम्हें इस रात की सहर चाहिए|

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