सियासत का वहशी नंगा नाच.. रोज़ देखता हूँ, हाथों में पत्थर, पैरों में कांच.. रोज़ देखता हूँ| कभी इसके सर तो कभी उसके सर टांग दिया, हर नए दिन एक नया सरताज.. रोज़ देखता हूँ| हाथों में पत्थर, पैरों में कांच.. रोज़ देखता हूँ| तुम मोदी चिल्लाते हो, या फिर राहुल जपते हो, मैं तुम्हारे