इंतज़ार

मगर कोई कमी है

मैं तुझे अपनी आँखों में भर तो लूँ ज़रा, न जाने क्यों वक़्त को, गुज़रने की हड़बड़ी है| गुज़र जायेगा मगर.. फिर से आएगा ज़रूर, ये जीवन दुःख और सुख की कड़ी दर कड़ी है| न जाने क्यों वक़्त को, गुज़रने की हड़बड़ी है… हैरत है के अब भी जिंदा हूँ किस तरह, देख जिंदिगी

मुन्तज़िर नाउम्मीद

मुन्तज़िर नाउम्मीद से हो गए थे हम, मौत के कितने करीब हो गए थे हम| खैर सांसे रहते आप लौट तो आये, अकेले कितने अजीब हो गए थे हम| मौत के कितने करीब हो गए थे हम… उसका ज़िक्र बातों में ढूँढते रहे ‘वीर’, नदीम अपने रकीब के हो गए थे हम| मौत के कितने

लंगड़ा वक्त

यादों के बोझ से वक्त लंगड़ा गया है! घड़ी के दो काँटों की बैसाखी लिए.. शाम से रेंग रहा है यहाँ| इसके हर कदम की आहट साफ़ साफ़ सुनाई देती है| यही वक्त था जो हमारे हाथों से यूँ फिसल जाया करता था| कैसे ख़ामोशी से ये अपने तेज कदम रखता था| आकर देखो, मैंने

कब आओगे

कब आओगे तुम आवाज़ लेकर, इंतज़ार में, ख़ामोशी शोर करती है| बेचैन हूँ, बेखबर हूँ यहाँ| मिटने का इरादा है, दुनिया ज़ोर करती है|

एक और दिन

एक और दिन जीता हूँ, एक और रात मरता हूँ, इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ| आफ़ताब से जलता हूँ, महताब से पिघलता हूँ, हर लम्हा तेरे बिन, पुर्जों में ढलता हूँ| इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ| लबों से ख़ामोशी का वादा है मेरा, चेहरे के नकाब से डरता हूँ|

इंतज़ार के सलीके

तहज़ीब की किताब में, ऐसा कोई पन्ना नहीं, देखे कोई जख्म-ऐ-दिल, ऐसा कोई चश्मा नहीं| जिसके माने खुद न समझे, समझेंगे वो क्या समझाए किसीके| जवानी-ऐ-रकीब, अभी सिकने है तुम्हे, इंतज़ार के सलीके| न जाने कितने ज़ख्म छुपाये किस दिल ने, यु हीं न जाओ पास किसी के, अभी सिखने है तुम्हे, इंतज़ार के सलीके|

वक़्त कट जाता है

वक़्त कट जाता है, गुन गुनाने में.. सांसों ने मुस्कुरा के कहा मौत से, बस इतना ही दम था, ज़माने में| वक़्त कट जाता है, गुन गुनाने में.. उनसे कहदो, सच और भी कड़वा है, सहम गए हैं जो अफ़साने में| वक़्त कट जाता है, गुन गुनाने में.. कल किसको इल्जाम दोगे ‘वीर’, जवानी गुज़ार

हिदायत

जलते चिरागों को बुझाया नहीं करते, वफ़ा में खुदी को मिटाया नहीं करते| इंतज़ार तो मोहब्बत का नसीब है, बेखुदी में होश गवाया नहीं करते| ख़ामोशी की सदा, ख़ामोशी ही होगी| हर आहट पे, सदाओं का दरवाज़ा, खटखटाया नहीं करते| ये सब दिल बहलाने के बहाने हैं! प्यार की स्याही हो, शमाओं में जलाया नहीं