जुदाई

फ़िराक से पहले

आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले, दोनों खामोश थे दिल-ए-बेबाक से पहले | अब के जो फूँक से उड़ा देते हो मुझे, मैं जो शोला था मुश्त-ए-ख़ाक से पहले | आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले… पहचान नहीं पाता हूँ इस दिल को मैं, ये जो गुलिस्तां था हज़ारों चाक से पहले |

पैरों में तेरे बेडियाँ हैं और हाथ मेरे बंधे हुए

क्या तुमसे बयां करूँ सबब-ए-हिज्र हमनफस, पैरों में तेरे बेडियाँ हैं और हाथ मेरे बंधे हुए | कहने को एक जिंदिगी दोनों के पास है मगर, इन मुस्कुराते चेहरों के पीछे हैं दिल जले हुए | पैरों में तेरे बेडियाँ हैं और हाथ मेरे बंधे हुए… एक आंधी चली और गुबार से उड़ गए हम, ज़माना

शर्त

मिलता है मगर बिछड़ने की शर्त पर, जिंदा तो है मगर मरने की शर्त पर | जिंदिगी तेरी अदा है या बेबसी मेरी, होसला मिलता है मगर डरने की शर्त पर | जिंदा तो है मगर मरने की शर्त पर… पल दो पल से ज़्यादा कहीं भी रुकता नहीं, वक्त अच्छा आता है गुजरने की

इन दिनों

तुम से आरजू मेरी कुछ नाराज़ है इन दिनों, खामोश लब में क़ैद, कोई राज़ है इन दिनों | जिंदिगी मगर थमी नहीं तुम्हारे बाद, अंजाम का दूसरा नाम, आगाज़ है इन दिनों | ग़ज़ल से रूठकर उस तक पहुँच भी जाऊं, मगर उन हाथों में सुखन का साज़ है इन दिनों | कभी दर्द

आज आपकी कमी बहुत खल रही है

जिंदिगी मजबूरीयों में ढल रही है, आज आपकी कमी बहुत खल रही है | आपके रुकसत से ही सब कुछ बदला, मैं थम गया और दुनिया चल रही है | आज आपकी कमी बहुत खल रही है… कोशिशों से हर दिन की सूरत संवारता हूँ, और स्याह रात आकर कालिक मल रही है | आज

तुम रोना मत

अपनी मजबूरियों पर, दिलों की दूरियों पर, रात की बेनूरियों पर, तुम रोना मत| अपनी तनहाइयों पर, माज़ी की परछाइयों पर, ज़माने की नादानियों पर, तुम रोना मत| दिल की मायूसियों पर, दर्द की खामोशियों पर, इन साँसों की बरबादियों पर, तुम रोना मत|

जिंदगी खूबसूरत है

गर फासले ज़रूरी हैं, तो फासले बनाये रखिये, जिंदगी खूबसूरत है, जिंदगी यूँ ही सजाये रखिए | रोज़मर्रा की जिंदगी में, जिंदगी रोज़ मरती है, कभी तो जी उठेगी, हर मोड़ पर आस लगाये रखिए | पोटली में दफ़न हैं, माज़ी के कई ज़ख्म गहरे, वो तुम्हें भूल जायेंगे, आप उन्हें भुलाये रखिए| वस्ल की बेचैनी हो, या हिज्र की मुसीबतें,

वो मुझसे जुदा और क्या होगा

अंजाम ए वफ़ा और क्या होगा, वो मुझसे जुदा और क्या होगा| हमें गम की आदत है और हसरत भी, सौदा ए इश्क में नफ़ा और क्या होगा| वो मुझसे जुदा और क्या होगा… ये भी दौर गुज़र जायेगा ‘वीर’, कोई खुदसे बेवफा और क्या होगा|

मिला क्या है

कहो मुझसे तुम्हें गिला क्या है, इन खामोशियों से तुम्हें मिला क्या है| और क्या हैं कुर्बत के मायने ‘वीर’, तुम्हें मुझसे दूर जाकर मिला क्या है| कहो मुझसे तुम्हें गिला क्या है…

कल रात

मिल गयी थी तुम कुछ पलों के लिए, फिर तुम्हें मैंने खोया था कल रात| मेरी आँखों में देर तलक बैठा रहा, वो अश्क भी रोया था कल रात| फिर तुम्हें मैंने खोया था कल रात… मलाल मुझ को है जागने का अब भी, ना उठने को क्यों ना सोया कल रात|